2 Best Motivational Story in Hindi | बेस्ट हिंदी कहानियाँ

Best Motivational Story in Hindi

Motivational story in Hindi:

इस पोस्ट में जीवन को दिशा दिखानेवाली २ बेहतरीन Motivational Story in Hindi देने का प्रयास किया गया है।  इसे पड़ने के बाद आपको अवश्य जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने को मिलेगा।

Top Motivational story in Hindi: समस्या का अंत

Motivational Story in Hindi

                                                                                 Motivational story in Hindi

चंदनपुर नाम का एक गांव था। उस गांव की आबादी लगभग ५ हजार थी। इस गांव में सभी व्यक्ति ज्यादातर किसान थे। उन पास अपनी खुद की जमीन थी जहां वह खेती करते थे और खेती से उत्पन्न होने वाले अनाजों को बेचकर अपनी आजीविका का निर्वहन करते थे। जीवन उनका खुशहाली से कट रहा था।

लेकिन उसी गांव में बीते कुछ दिनों में उनके लिए एक बड़ी समस्याएं उत्पन्न हो गई थी। उनकी नई समस्या थी एक नहर । दरअसल, उनके गांव और शहर(जहां के मंडियों में अनाज बेचते थे) को जोड़ने वाली सड़क गांव के दूसरे छोर पर थी।

 सड़क और गांव के बीच एक  नहर पड़ती था जिसपर बना पुल जर्जर हो गया था। जिसकी वजह से उन्हें दूसरे रास्ते से कई किलोमीटर घूम कर मंडियों में जाना पड़ता था जिससे उनका समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च होते थे इससे उन्हें आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता था।

उन गांववालो ने कई बार इस बात की शिकायत वहां के स्थानीय प्रशासन से की, कई बार कई नेताओ से भी मिले लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता।

उसी गांव में भोलाराम नाम का एक किसान भी रहता था। उसका एक बेटा था जिसका नाम हरिप्रसाद था। वह हाल ही में शहर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करके लौटा था। जब उसे इस समस्या का पता चला तो उसने सभी गांववालों को इकट्ठा किया।

उसने उनसे कहा कि आप सभी ने कई बार प्रशासन से शिकायत की लेकिन हर बार आप सब को निराशा ही हाथ लगी। तो क्यों न हम ये पुल का निर्माण खुद ही कर लेते हम कब तक प्रशासन से फरियाद करते रहेंगे।ये बात सुनकर सभी गांववाले उसपर हसने लगे। उन्होंने कहा, “जो काम प्रशासन नहीं कर रही वो हम कैसे करेंगे,और इसमें खर्च भी बहुत आयेगा वो पैसा कहां से आयेगा?” 

तब हरी ने उन्हें समझते हुए कहा कि देखिए, आप सभी कई महीनों से दूसरे रास्ते से होकर मंडियों में जाते है, जिससे आपका काफी अतिरिक्त पैसा खर्च हो जाता है,जिससे आप सब को कम पैसे बचते है। आज हम अगर ये पुल बना लेते है तो हमारे काफी पैसे आनेवाले समय में बचेंगे जिससे हमें ज्यादा बचत होगी और हमारा समय भी बचेगा। 

लोगो को हरी की बाते समझ में आ गई थी। उन सभी ने मिलकर अगले दिन ही पुल के निर्माण का कार्य आरंभ कर दिया। और उनके अथक प्रयास से कुछ ही दिनों में पुल बनकर तैयार हो गया और उस गांव की एक बड़ी समस्या का अंत हो गया।

सीख: जहां चाह वहां राह

दोस्तो, देखा आपने कैसे हरि के एक समझदारी भरे फैसले से न सिर्फ उस गांव की एक बड़ी समस्या का अंत हुआ बल्कि उन गांव वालो को आनेवाले समय में आर्थिक बचत भी अधिक होगी।

शुरुआत में वो गांव के लोग उसका मजाक बना रहे थे उसपर हस रहे थे लेकिन वो नहीं डिगा और उन्हें पुल बनाने के लिए मनाया और आज एक बड़ी समस्या का अंत भी किया।

हमारे जीवन में भी चाहे वो व्यक्तिगत हो या सार्वजनिक जब समस्या आती है तो हममें से कई लोग घबरा जाते है,हम डर जाते है कि लोग क्या कहेंगे,लोग हम पर हसेंगे। जिससे हम कई समस्यायों से घिरे रहते है। 

हम इंतेज़ार करते है कि कोई आए और हमारी समस्याओं को दूर कर दे लेकिन ज्यादातर समस्याएं लंबे समय तो जस की तस बनी रहती हैं। ऐसे में हमें स्वयं आगे आकर अपनी समस्या को मिलजुलकर हल करना चाहिए। 

क्योंकि अगर समस्याएं ऐसे ही बनी रही तो ये और भी नई समस्याओं को जन्म देगी। इसलिए मिलजुलकर जल्द से जल्द इन्हे ख़त्म कर देना चाहिए जैसा कि हरी ने किया।

Best Motivational story In Hindi: सब्र का फल

Best Motivational Story in Hindi

          Motivational story in Hindi

बहुत पुरानी बात है एक बार एक बालक धनुर्विद्या सीखने के उद्देश्य से एक आचार्य के पास गया।उसने उनसे कहा आचार्य मै धनुर्विद्या सीखना चाहता हूं,कृपया कर आप मुझे धनुर्विद्या सिखाए।

आचार्य उस समय ध्यान कर रहे थे उन्होंने कुछ नहीं कहा और ध्यान में बैठे रहे। उस बालक ने एक बार फिर कहा, “आचार्य मुझे धनुर्विद्या सीखनी है आप मुझे धनुर्विद्या कृपया करके सिखाइए”, लेकिन इस बार भी आचार्य ने कोई उत्तर नहीं दिया।

 कुछ समय बाद आचार्य अपने ध्यान से उठे उन्होंने उस बालक की तरफ देखा और कहा, “तुम धनुर्विद्या क्यों सीखना चाहते हो?” तो उस बालक ने कहा, “क्योंकि मैं अपने दोस्तों को साबित करना चाहता हूं कि मैं भी एक कुशल धनुर्धर बन सकता हूं जो कहते है की मै कभी धनुष् विद्या नहीं सीख सकता।

आचार्य ने कहा,उन्होंने सही कहा मैं तुम्हें धनुर्विद्या नहीं सिखा सकता। इस पर उस बालक ने पूछा, आप मुझे धनुर्विद्या क्यों नहीं सिखा सकते क्या मुझमें कोई कमी है? तब आचार्य ने कहा, नहीं तुम में कोई कमी नहीं है, लेकिन तुम वह बात नहीं मानोगे जो मैं कहूंगा। क्योंकि तुमने धैर्य की कमी है ।

 तब उस बालक ने कहा,गुरुदेव” मैं आपकी हर बात मानूंगा जो आप कहेंगे”। इसका मैं आपको आश्वासन देता हूं ।इस पर आचार्य ने कहा, यदि तुम मुझे आश्वासन देते हो तो मैं तुम्हें धनुर्विद्या से खाऊंगा लेकिन यदि तुम मुझे निराश करोगे तो मैं तुम्हें धनुर्विद्या सिखाना बंद कर दूंगा। बालक ने आचार्य की बात को स्वीकार कर लिया और उस बालक का उस गुरुकुल में प्रवेश हो गया।

अगले दिन सुबह आचार्य इस बालक के पास आए, उन्होंने उस बालक से कहा कि आज तुम्हारा काम  गौसाला संभालने का है। जाओ और सारे गायों को चारा और पानी दो और उनकी सेवा करो।उस बालक की समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा है, लेकिन वह वचनबद्ध था।

वह गायों की सेवा करने के लिए गौशाला में चला गया वहां जाकर उसने गायों की सेवा की चारा और दाना दिया और उन्हें पानी पिलाया।

अगले दिन फिर उसके गुरु उसके पास आए और इस बार उन्होंने उसकी नियुक्ति साफ सफाई के काम में लगा दी।बालक को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसके गुरु उससे चाहते क्या है। वो यहां धनुर्विद्या सीखने के लिए आया था और उसे इन साफ सफाई और गायों के संभालने के काम में लगा दिया गया है उस काफी क्रोध भी आता परन्तु वचनबद्ध होने कारण कुछ कह नहीं पाता था।

यह क्रम कई महीनों तक चला। कभी उसके गुरु उस गाय संभालने के काम में लगाते,कभी जंगल से लकड़ियां तोड़ने के काम में लगाते,कभी रसोईघर में रसोइए कि मदद करने के के काम में लगाते तो कभी साफ सफाई के काम में लगा देते। 

कुछ दिनों तक वह बालक काफी झल्लाया लेकिन फिर धीरे धीरे वो इसका अभ्यस्त हो गया और अब उसे इन काम आनन्द आने लगा अब गुरु को उससे किसी काम के लिए कहना नहीं पड़ता वह खुद सारे काम कर डालता।

एक दिन गुरु उसके पास आए और उसे वहां बुलाया जहां वो धनुर्विद्या की शिक्षा देते थे। उन्होंने उस बालक की धनुर्विद्या देने की शिक्षा आरंभ की। प्रारम्भ में धनुष पर प्रत्यंचा कैसे चढ़ाया जाता है,कैसे तीर को धनुष पर लगा कर छोड़ा जाता है कैसे निशाना लगाया जाता आदि सब सिखाया। 

उस बालक ने काफी लगन से वो शिक्षा ग्रहण करने लगा कुछ ही दिनों में वो धनुर्विद्या में पारंगत हो गया। अब वो किसी भी लक्ष्य को आसानी से भेद सकता था।

जल्द ही उस बालक ने अपनी सम्पूर्ण शिक्षा पूरी कर ली। गुरुकुल से अपने घर वापस जाने से पहले वो बालक अपने गुरु से मिलने गया और उनसे प्रश्न किया,गुरुदेव,”जब आप मुझे आसानी से ये सारी विद्या से सकते थे तो आप ने मुझे कई दिनों तक क्यों गौशाला,साफ सफाई,भोजन आदि व्यवस्था के काम में लगाया।”

तब गुरु ने मुस्कुराते हुए कहा, सभी चीजों को सीखने का एक वक्त होता है,उस समय तुम धनुर्विद्या की शिक्षा के लिए तैयार नहीं थे,तुम में काफी क्रोध, लापरवाही भारी हुई थी।साथ ही तुममें धैर्य की भी कमी थी। 

एक योद्धा के लिए सारी चीजे बहुत मायने रखती है,इसलिए मैंने तुम्हे उचित वक्त आने पर ही धनुर्विद्या की शिक्षा दी। इसी कारण आज तुम एक सफल और कुशल धनुर्धर बन सके हो। बालक की समझ में ये बात आ चुकी थी।

दोस्तो चाहे एक योद्धा हो या एक आम इंसान ये बात सभी पर लागू होती है कि धैर्य और अनुशासन जीवन का एक महत्वपूर्ण अंग होता है।जिसने भी इन महत्वपूर्ण अंग को अपनाया वो अपने जीवन सफल हुआ है फिर चाहे मल्टीनेशनल कंपनी के CEO  हो  या फिर देश के प्रधानमंत्री। हमें भी इन महत्वपूर्ण गुणों को अपना कर जीवन में सफल बनने का प्रयास अवश्य करना चाहिए।

 

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